Tuesday, August 31, 2010

07/05/2017


घेर लेती उदासी और सूनापन
न दिखता कोई साथ सहारा
मन की घोर निराशा के क्षण में
बहती चाह, तमन्नाओं की व्यर्थ निरंतर धारा
सबसे अच्छे दिन, साल गुजरते जब जीवन में
सोचूं प्यार करूँ मैं! लेकिन किसको?
व्यर्थ यत्न यह दिखता
शाश्वत प्यार भला कब संभव!
अपने ही अंतर्मन झाँकूँ
वहां न कोई दीपक जलता
ख़ुशी-गम, चाहत का लगता मेला
अंतर्द्वंद के वीराने में
रहता जीवन कितना अकेला!

kay dil ne kaha

hi.....

Friday, August 20, 2010

यूही दिल आज फिर रोया अपने ही फ़ैसले पर


गोया जहाँ से चला था आज वही खड़ा हुआ है |



इतना लंबा रास्ता चुना है हमने अनजाने या जान बूझकर

सफर पर चलते कदम रुकते नही , इन्तेहा की हद्द हुई

About rishikesh History

ऋषिकेश से सम्बंधित अनेक धार्मिक कथाएँ प्रचलित हैं। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकला विष शिव ने इसी स्थान पर पिया था। विष पीने क...